अन्तरात्मा

0
103

जो खुद की नजर में गिर गया,
खुदा भी उससे दूर चला जायेगा।
बेसक मुखौटे लगाये बाहर घुमेंगे,
सकून अलविदा कह दूर होजायेगा॥


जो खुद की नजर में———‘
ऐ मेरे दिल, प्रतिक्रियाओं का भय छोड,
ससक्त अन्तरात्मा से प्रगाढ नाता जोड़।
जल्दी अनाचार, व्यभिचार से तौबा कर,
सचमुच कीचड़ में कमल खिल जायेगा॥
जो खुद की नजर में———‘
दुनियां को धोखा देना है, अति आसान,
नहीं भुला सकता, दुष्कर्म कोई इन्सान।
अन्तकाल चलचित्र स्वकर्म के दृष्यों का,
भयंकर नासूर तुम्हें पीड़ीत कर जायेगा॥
जो खुद की नजर में———‘