अहिंसा

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अत्याचार विरोध अहिंसा का प्रतिबिम्ब है।
अन्याय संवर्धन हिंसा का मुख्य स्तम्भ है॥
एक गाल पर थप्पड़ खाकर,
दूसरा सामने करना कमजोरी है।


यह नैसर्गिक सिद्धान्त नही,
न्यायोचित प्रतिकार जरूरी है।
ऐ मेरे वतन के रहनुमाओ,
व्यर्थ समय न बर्बाद करो।
सुरक्षा बलों के हाथ न बांधो,
उनकी क्षमता का उपयोग करो।
नेस्तनाबूद करना आतताईयों का दम्भ है॥
अत्याचार विरोध अहिंसा———-‘
अहिंसा स्थापित करने हेतु,
श्रीकृष्ण ने गीता ज्ञान दिया।
आक्रान्ताओं से आजादी पाने,
वीर शहीदों ने बलिदान दिया।
चिरनिद्रा में सोये रहे अगर,
भावी पीढियां नहीं माफ करेंगी।
अकर्मण्यता त्याग आक्रामक बनो,
कर्मठता ही इन्साफ करेगी।
भारत मां के भाल सजाना विजयी अहिंसा
कुम्भ है॥
अत्याचार विरोध अहिंसा———-‘

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