रावण पुतला दहन

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गत वर्षों जैसे इस दफा भी,
दशहरा पर्व धूम-धाम से सेलिब्रेट किया।
अति उमंग से रावण का पुतला,
लीला मैदान में दहन हेतु सेट किया।


अतिथीश्री ने हर्षित दिल से,
पुतले पर धनुष-बाण संधान किया।
गर्व से अपना शीश उठाकर,
दर्शकगण को विजय दिवस संदेश दिया।
गत वर्षों जैसे———————‘
पुतला दहन कार्यक्रम के मध्य,
साथी ने उनको बुरी खबर थी सुनाई।
इक युवती ने उनके सपूत पर,
बलात्कार की रिपोर्ट थी दर्ज कराई।
आग उगलते श्रीमान ने,
दरोगा को झट से फोन लगाया।
पद प्रतिष्ठा की धोंस के साथ,
दूरदराज तबादले का ब्रह्मास्त्र चलाया।
गत वर्षो जैसे——————–‘
सभी न्यूज चेनल वालों को तुरन्त,
लीला मैदान पहुंचने का हुक्म सुनाया।
प्रेस कान्फ्रेंस में पुरजोर दहाड़े,
सुपुत्र को विरोधियों ने है फंसाया।
न्यायालय पर विश्वास जताकर,
पीड़ित को नितान्त चरित्रहीन ठहराया।
पद व धन बल दुरूपयोग से,
बलात्कारी सपूत आरोप मुक्त करवाया।
गत वर्षों जैसे—————‘
यह मिथ्याचरण देख रावण का,
जलता पुतला कर उट्ठा भीषण चित्कार।
हे जन सेवक अतिशीघ्र त्यागो,
अपना यह दोगलेपन का दंभी व्यवहार।
सदाचार का मुखौटा लगाकर,
सिंचित करते अन्याय व अत्याचार।
सीता हरण का हूं मैं दोषी,
पर नहीं त्यागा नारी मान का शिष्टाचार।
सदियों से पुतला दहन करते हो,
पर अपने दुष्कर्मो को लोगों से छिपाया।
गत वर्षों जैसे————–‘