ललकार

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भारत मां के वीर बांकुरे,
बांध कफन तैयार हैं।
अनन्त काल लहराये तिरंगा,
हम इसके सिपहसालार हैं॥

आंच न ध्वज पर आने देंगे,
यह सिंहों की ललकार है।
बेसब्री से जन्नत की हूरों को,
दहसतगर्दों का इन्तजार है॥
भारत मां के वीर————‘
आतंक के आकाओ सुनलो,
पहले टिकट तुम्हारे कटेंगे।
चुन-चुन कर दहसतगर्दों के,
ताबूत वहां पर भिजवादेंगे॥
नहीं रूकेंगे, अंत करेंगे,
आतंक पर पलटवार है।
आस्तिन के सर्प कुचलने,
शांती दूत तैयार हैं॥
भारत मां के वीर————‘

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