Aarakshan ya rojgourounmukhi

9
166

देश की स्वतन्त्रता के समय आदिवासी व दलित जन उत्थान हेतु आरक्षण का प्रावधान किया गया था। कालान्तर में आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिये विकसित वर्ग भी पिछड़े वर्ग में शामिल होने के लिये आन्दोलनों की राह पर चल पड़ा। इस विषय पर चंद पंक्तियां कलमबद्ध की हैं:-

अब आरक्षण है अजब पहेली, राजनीति चमकाने की।

अगड़ों पिछड़ों का गणित बताकर, वोटों की जुगत बैठाने की॥

जन प्रतिनिधियों कोशीशें छोडो, जन मानस को बरगलाने की।

सर्वशिक्षा सुगम करो कुछ ऐसी, जो योजना सफल करे बेरोजगारी मिटाने की॥

आरक्षण है अजब पहेली———————

शिक्षित हो इस देश के वासी, जब स्वनिर्भर हो जायेंगे।

विकासोन्मुख होगा देश हमारा, कोइ न पिछड़े कहलायेंगे॥

भेदभाव से मुक्त हो जन गण, सफलता के परचम लहरायेंगे।

अर्थपूर्ण शिक्षा की सुविधायें, सम्पूर्ण मातृभूमि में विकसित करपायेंगे॥

बंदरबांट के जुमले त्यागो, कोशीश करो सही शिक्षा नीति अपनाने की।

आरक्षण है अजब पहेली———————

शिक्षाविदों से करबद्ध है विनती, आवो आयोजन में योगदान करें।

इक दूजे के दोष बताकर, न व्यर्थ समय अब बर्बाद करें॥

नव सर्जन करने हेतु सब मिल, अथक भागीरथ प्रयास करें।

अवश्य सफल हम हो पायेंगे, निश्चिंत हो दृड्ढ विश्वास करें॥

सरकारी व जन भागीदारी के सम्मिश्रण से, जरूरत है नई इबारत लिखवाने की।

आरक्षण है अजब पहेली——————–

Image Source :- Canva

9 COMMENTS

  1. ????? ??? ?? ?????—????? ?? ?????? ???? ?? ???? ???? ?? ?? ??? ??? ???? ???? ????? ??? ??? ??? ???????? ?? ???? ??? ?? ???? ??? ???????? ?? ?????? ?? ??????? ?? ??? ?????

Comments are closed.